Election Commission of India extends SIR voter list revision deadline to December 11 for 12 states including UP and West Bengal 2025
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नई दिल्ली: भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India - ECI) ने देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहे वोटर लिस्ट के विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision - SIR) के शेड्यूल में बड़ा बदलाव किया है। आयोग ने रविवार को एक अहम फैसला लेते हुए वोटर लिस्ट रिविजन की समय-सीमा को एक हफ्ते के लिए बढ़ा दिया है।

यह फैसला उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल जैसे बड़े राज्यों के वोटर्स के लिए एक बड़ी राहत है। अब लोगों के पास अपना नाम जुड़वाने, हटाने या सही करवाने के लिए अतिरिक्त समय मिल गया है।

क्या है नया शेड्यूल? (New Dates)

चुनाव आयोग द्वारा जारी नई समय-सारणी के अनुसार, अब पूरी प्रक्रिया एक हफ्ते की देरी से पूरी होगी। यह तारीखें नोट कर लें:

  1. एन्यूमरेशन फॉर्म जमा करने की आखिरी तारीख: अब 11 दिसंबर 2025 तक बढ़ा दी गई है (पहले यह 4 दिसंबर थी)
  2. ड्राफ्ट वोटर लिस्ट (Draft Roll) पब्लिकेशन: अब 16 दिसंबर 2025 को होगा (पहले 9 दिसंबर को होना था)
  3. दावे और आपत्तियां (Claims & Objections): 16 दिसंबर 2025 से 15 जनवरी 2026 तक।
  4. फाइनल वोटर लिस्ट (Final Roll): अब 14 फरवरी 2026 को जारी की जाएगी (पहले यह 7 फरवरी को आनी थी)

किन 12 राज्यों में लागू होगा यह नियम?

यह SIR प्रक्रिया देश के उन राज्यों में चल रही है जहाँ वोटर लिस्ट बहुत पुरानी हो चुकी थी या जहाँ फर्जी वोटर्स की शिकायतें थीं:

  1. उत्तर प्रदेश
  2. पश्चिम बंगाल
  3. तमिलनाडु
  4. केरल
  5. राजस्थान
  6. मध्य प्रदेश
  7. छत्तीसगढ़
  8. गुजरात
  9. गोवा
  10. अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
  11. लक्षद्वीप
  12. पुडुचेरी

SIR क्या है और यह आम रिविजन (SSR) से अलग क्यों है?

अक्सर लोग कंफ्यूज होते हैं कि यह SIR (Special Intensive Revision) क्या है?

  1. SSR (Special Summary Revision): जैसा की आप जानते है यह हर साल होता है, जिसमें सिर्फ नए नाम जोड़े जाते हैं और मरने वालों के नाम हटाए जाते हैं।
  2. SIR (Special Intensive Revision): यह बहुत खास और गहरा संशोधन होता है। इसमें चुनाव आयोग के अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर एक-एक वोटर का सत्यापन (Verification) करते हैं। पुरानी फोटो वोटर आईडी को बदला जाता है और डुप्लीकेट नामों को सख्ती से हटाया जाता है। भारत में यह प्रक्रिया कई सालों बाद इतने बड़े स्तर पर हो रही है।

तारीख क्यों बढ़ाई गई?

सूत्रों के मुताबिक, चुनाव आयोग ने यह फैसला विपक्षी दलों की मांग और जमीनी स्तर पर रही दिक्कतों को देखते हुए लिया है।

  1. BLO पर दबाव: कई राज्यों से खबरें रही थीं कि बीएलओ (Booth Level Officers) पर काम का बहुत ज्यादा दबाव है। समय कम होने की वजह से सर्वे सही से नहीं हो पा रहा था।
  2. विपक्ष का विरोध: तृणमूल कांग्रेस (TMC) और समाजवादी पार्टी (SP) समेत कई विपक्षी दलों ने आयोग से समय बढ़ाने की मांग की थी। उनका कहना था कि त्यौहारों के सीजन के कारण कई लोग अपने घरों पर नहीं मिल पाए, जिससे उनका नाम कटने का डर था।

अपना नाम कैसे जुड़वाएं या चेक करें? (Step-by-Step Guide)

अगर आप इन 12 राज्यों में रहते हैं, तो आपके पास यह सुनहरा मौका है:

1. ऑनलाइन तरीका:

  1. चुनाव आयोग की वेबसाइट voters.eci.gov.in पर जाएं या Voter Helpline App डाउनलोड करें।
  2. 'New Registration' (Form 6) पर क्लिक करें।
  3. अपनी फोटो, एड्रेस प्रूफ (आधार/राशन कार्ड) और एज प्रूफ अपलोड करें।

2. ऑफलाइन तरीका:

  1. अपने क्षेत्र के BLO (Booth Level Officer) से संपर्क करें।
  2. वे आपके घर आएंगे या आप पोलिंग बूथ पर जाकर उनसे मिल सकते हैं।
  3. उनसे फॉर्म लेकर भरें और जरूरी दस्तावेज जमा करें।
  4. 11 दिसंबर तक यह काम जरूर कर लें।

राजनीतिक महत्व: यूपी और बंगाल पर नजर

यह रिविजन सिर्फ एक सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी बहुत अहम है।

  1. पश्चिम बंगाल: यहाँ फर्जी वोटर्स और घुसपैठियों के नाम वोटर लिस्ट में होने के आरोप लगते रहे हैं। SIR के जरिए आयोग लिस्ट को पूरी तरह 'साफ' (Clean) करना चाहता है।
  2. उत्तर प्रदेश: 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह एक बड़ी कवायद है। राजनीतिक पार्टियां चाहती हैं कि उनके समर्थक वोटर्स का नाम किसी भी हाल में कटे।

निष्कर्ष

चुनाव आयोग का यह कदम स्वागत योग्य है। एक हफ्ते की मोहलत से केवल कर्मचारियों को राहत मिलेगी, बल्कि यह भी सुनिश्चित होगा कि कोई भी पात्र नागरिक लोकतंत्र के इस महापर्व में हिस्सा लेने से वंचित रह जाए। 14 फरवरी 2026 को जब फाइनल लिस्ट आएगी, तो उम्मीद है कि वह भारत की अब तक की सबसे सटीक वोटर लिस्ट होगी।


डिस्क्लेमर: इस पोस्ट में इस्तेमाल की गई सभी तस्वीरें AI (Artificial Intelligence) द्वारा बनाई गई हैं और केवल प्रतीकात्मक (Representational) उद्देश्य के लिए हैं।