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काठमांडू/नई दिल्ली: भारत के पड़ोसी देशों के साथ रिश्तों में एक बार फिर खटास देखने को मिल रही है। ताज़ा मामला नेपाल का है, जिसने हाल ही में एक विवादित और चौंकाने वाला कदम उठाते हुए अपना एक नया 100 रुपये का करेंसी नोट जारी करने का फैसला किया है। इस नोट पर छपे नक्शे ने दोनों देशों के बीच एक पुराने और संवेदनशील सीमा विवाद को फिर से हवा दे दी है।

नेपाल ने अपने इस नए नोट पर लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा के क्षेत्रों को अपने नक्शे में दिखाया है, जबकि भारत इन क्षेत्रों को अपना अभिन्न अंग मानता है। यह सिर्फ एक नोट नहीं, बल्कि भारत के लिए एक बड़ा कूटनीतिक संदेश है कि काठमांडू का रुख अब बदल रहा है।

1. क्या है नेपाल के नए नोट का विवाद?

नेपाल सरकार ने एक 'स्पेसिमेन' (नमूना) जारी किया है जिसमें 100 रुपये के नोट पर नेपाल का नया नक्शा छापा गया है।

  • विवादित क्षेत्र: इस नक्शे में उत्तराखंड के पिथोरागढ़ जिले से सटे तीन महत्वपूर्ण क्षेत्रोंलिपुलेख (Lipulekh), कालापानी (Kalapani) और लिम्पियाधुरा (Limpiyadhura)को नेपाल का हिस्सा बताया गया है।
  • इतिहास: यह विवाद 2020 में तब शुरू हुआ था जब नेपाल की तत्कालीन सरकार ने संविधान संशोधन करके इन क्षेत्रों को अपने आधिकारिक नक्शे में शामिल किया था। अब इसे करेंसी नोट पर छापकर नेपाल ने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और घरेलू राजनीति में जिंदा कर दिया है, जो भारत के साथ संबंधों को और जटिल बना सकता है।

2. 'काली नदी' का पेंच: विवाद की जड़

इस पूरे विवाद की जड़ ऐतिहासिक सुगौली की संधि (Treaty of Sugauli, 1816) और काली नदी का उद्गम स्थल है।

  • संधि के अनुसार, काली नदी के पूर्व का हिस्सा नेपाल का और पश्चिम का हिस्सा भारत का है।
  • विवाद: समस्या यह है कि नदी का उद्गम स्थल कहाँ है? नेपाल मानता है कि नदी लिम्पियाधुरा से निकलती है, इसलिए वो पूरा इलाका उसका है। जबकि भारत के अनुसार, नदी का उद्गम कालापानी के पास है, इसलिए यह क्षेत्र भारत का है और सामरिक रूप से भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

3. चीन की 'चेकबुक डिप्लोमेसी': असली खिलाड़ी कौन?

नेपाल के इस कदम के पीछे सिर्फ राष्ट्रवाद नहीं, बल्कि चीन (China) का बड़ा हाथ माना जा रहा है। चीन अपनी कुख्यात 'चेकबुक डिप्लोमेसी' (Checkbook Diplomacy) के जरिए नेपाल में भारी निवेश कर रहा है।

  • कर्ज का जाल: चीन ने नेपाल में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स (जैसे पोखरा एयरपोर्ट) शुरू किए हैं, जिससे नेपाल चीन के कर्ज के बोझ तले दबता जा रहा है।
  • राजनीतिक प्रभाव: के.पी. शर्मा ओली और अब प्रचंड की सरकार के दौरान नेपाल का झुकाव स्पष्ट रूप से चीन की तरफ बढ़ा है। चीन चाहता है कि भारत के पड़ोसी देश भारत के खिलाफ खड़े हों, और नेपाल का यह नया नोट उसी रणनीति का हिस्सा लगता है।

4. गोरखा रेजिमेंट और अग्निपथ योजना पर असर

नेपाल और भारत के बिगड़ते रिश्तों का एक और गंभीर पहलू भारतीय सेना (Indian Army) पर पड़ सकता है।

  • गोरखा कनेक्शन: भारतीय सेना की गोरखा रेजिमेंट में बड़ी संख्या में नेपाली भर्ती होते रहे हैं। उनकी बहादुरी की मिसालें पूरी दुनिया में दी जाती हैं।
  • अग्निपथ विवाद: लेकिन भारत की नई 'अग्निपथ योजना' (Agnipath Scheme) को लेकर नेपाल सरकार ने आपत्ति जताई है और नेपाली युवाओं की भर्ती रोक दी है। अगर यह विवाद बढ़ता है, तो भारतीय सेना और नेपाल के बीच का यह सदियों पुराना रिश्ता टूट सकता है, जो दोनों देशों के लिए नुकसानदायक होगा।

5. भारत के पड़ोसी क्यों हो रहे हैं खिलाफ?

नेपाल अकेला नहीं है। पिछले कुछ समय में भारत के लगभग सभी पड़ोसी देशों मालदीव, श्रीलंका, बांग्लादेश और अब नेपाल के सुर बदले हुए नज़र रहे हैं।

  • मालदीव: वहां की मुइज्जू सरकार ने "इंडिया आउट" का नारा देकर सत्ता हासिल की और भारतीय सैनिकों को वापस भेजा।
  • बांग्लादेश: शेख हसीना के जाने के बाद वहां भी भारत विरोधी भावनाएं उफान पर हैं।
  • कारण: चीन का बढ़ता प्रभाव और इन देशों की घरेलू राजनीति में भारत विरोधी भावनाओं को भड़काकर वोट बटोरने की रणनीति इसका मुख्य कारण है।

6. भारत की प्रतिक्रिया: संयम और शक्ति

भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने साफ कर दिया है कि "एकतरफा कार्रवाई से हकीकत नहीं बदलती।" नेपाल के नोट पर नक्शा छापने से जमीन पर स्थिति नहीं बदलेगी, ये क्षेत्र भारत के नियंत्रण में हैं और रहेंगे।

लेकिन कूटनीतिक तौर पर यह भारत के लिए चिंता का विषय है। भारत अब अपनी "नेबरहुड फर्स्ट" नीति के साथ-साथ "India First" की नीति पर भी चल रहा है। भारत को अब 'सॉफ्ट पावर' (मदद और संस्कृति) के साथ-साथ 'हार्ड डिप्लोमेसी' (सख्त संदेश) का भी इस्तेमाल करना होगा ताकि पड़ोसी देश लक्ष्मण रेखा लांघें।

निष्कर्ष

नेपाल का यह कदम सिर्फ एक कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि भारत के लिए एक संदेश है कि पड़ोसी अब बदल रहे हैं। चीन की छाया में पल रहे ये विवाद दक्षिण एशिया की शांति के लिए खतरा बन सकते हैं। भारत को अब सतर्क रहना होगा और अपनी कूटनीति को और धारदार बनाना होगा।


डिस्क्लेमर: इस पोस्ट में इस्तेमाल की गई सभी तस्वीरें AI (Artificial Intelligence) द्वारा बनाई गई हैं और केवल प्रतीकात्मक (Representational) उद्देश्य के लिए हैं।